Blog Page

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipisicing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua. Ut enim ad minim veniam, quis nostrud exercitation ullamco laboris nisi ut aliquip ex ea commodo consequat.

NSS

समस्त रा से यो के सेवाकर्मियों (वालंटीर्स ) को सूचित किया जाता है वे अपने समूह के साथ मिलकर सभी प्रकार के विकास कार्यों में भाग ले तथा समूह का मुखिया कार्यक्रम से सम्बन्धित छायाचित्र इस स्थान पर अंकित करें

आज दिनांक 16.09.2018 को वेदव्यास परिसर अपना 22वा स्थापना दिवस मनाया। साथ ही स्वच्छता ही सेवा नामक अभियान के सन्दर्भ में विचार गोष्ठी आयोजित की गई। इस अवसर पर  अतिथि के रूप में डॉ देशराज शर्मा, विश्रान्त शास्त्र अध्यापक अपना वक्तव्य प्रस्तुत किए। अपने परिसर को और सुन्दर और स्वच्छ रखने के उपाय व उक्त विषय पर अपना अभिमत कु नीतू, सभ्या, अंजना देवी, हितेश, कुशाग्र आदि छात्रों ने व्यक्त की। इस कार्यक्रम का आयोजन रा से यो के वेदव्यास इकाई के द्वारा किया गया। ध्यातव्य है कि दिनांक 10 सितम्बर से ही परिसर का रा से यो इकाई स्वच्छता अभियान को चला रहा है। इस अवसर पर परिसर के समस्त अध्यापक गण तथा कर्मचारी गण एवं दोनों छात्रावासों के छात्र छात्राएं उपस्थित रहें।

WorkshopSchedule: 17 March – 24 March 2017 कार्यक्रम अवधि 17 मार्च से 24 मार्च, 2017

ज्योतिष विभाग, वेदव्यास परिसर, राष्ट्रिय संस्कृत संस्थान, बलाहर, हिमाचल प्रदेश द्वारा आयोजित साप्ताहिक राष्ट्रिय ज्योतिष कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विज्ञान व ज्योतिष के विषय पर विचारविमर्श व् परिचर्चा है | इस सन्दर्भ में शोधपत्रों का वाचन भी एक उद्देश्य है। प्रतिदिन कम से कम तीन शोधपत्र प्रस्तुत किये जायेंगे | ज्योतिष विषय में रुचि रखने वाले व्यक्ति, शोधकर्ता व अध्यापक इस कार्यशाला में निशुल्क भाग ले सकते हैं और शोध पत्र भी प्रस्तुत कर सकते हैं |

ज्योतिष की (में) वैज्ञानिकता

ज्योतिष के वैज्ञानिक पहलू अथवा ज्योतिष में वैज्ञानिक पहलुओं पर विचार विमर्श करने के लिये हमारे प्रयास हमेशा संकोच या डर से भरे रहते है। बहुत बार इस प्रकार के संवेदनशील मुद्दों को स्पर्श करने से बचे रहना भी चाहते है। ज्योतिष को विज्ञान कहने में कोई कसर न छोडते है किन्तु जब उसे प्रदर्शित करने की बात आती है अथवा उसके सन्दर्भ में विचार विमर्श करने की बात आती है तो हमारा दिल में गबराहट सी हो जाती है। इसका कारण क्या हो सकता है?

  1. क्या हमारे विचार कहीं ज्योतिष को अवैज्ञानिक तो सिद्ध नहीं कर देगा?
  2. क्या कोई हमारे क्षमता के ऊपर प्रश्न चिन्ह ते नहीं लगा देगा?

ये तो कुछ मौलिक डर है जो हमें प्रायः इस प्रकार के प्रयासों से रोक देता है।

 अपने अस्तित्व के खातिर

बहुत बार हम अपने अस्तित्व को बचाने का प्रयास करते है। विभिन्न चर्चाओं में हमारे बात को मनाने का प्रयास करना ही हम अस्तित्व समझते है। बहुत बार किसी के प्रश्न करने पर हम गुस्से में भी आ जाते है। हम चर्चा का स्थान भी छोड देते है। यदि कोई हमसे कम स्तर का या उम्र का विद्वान हमारे प्रश्न का उत्तर देना चाहते है वा हमसे उलझ जाता है तो हम उसे बहुत सुना भी देते है।

क्या आप तय्यार है?

  1. क्या आप खुले दिल से निडर चर्चा के लिये तय्यार है?
  2. क्या आप राग और द्वेष को छोडकर शान्तिपूर्ण संवाद के लिये तय्यार है?
  3. क्या आप नये चिन्तन का नीव डालना चाहते है?
  4. क्या आप अपने अस्मिता के साथ समझौता न करते हुए नये विचार धारा को जनम देना चाहते है?
  5. क्या आप भारतीय ज्योतिष में नये विज्ञान के अंशों को परखना चाहते है?
  6. क्या आप ग्रह प्रभाव के असलियत पर अपना प्रस्तुत करना चाहते है?
  7. क्या आप ज्योतिष के प्रति अपनी निजी कोई वैज्ञानिक राय रखते है?

कार्यशाला क्या चाहता है

कार्यशाला मुख्य रूप से भारतीय ज्योतिष के आधार भूत तत्त्वों की वैज्ञानिकता के बारे में विचार विमर्श करने के लिये उद्देशित है। काल के बारे में, कर्म के फल भुगतने के सन्दर्भ में , ग्रहों के प्रभाव पर, कर्म के संचित अवस्था पर , ग्रहों की सहयाता से कर्मों के फल को परिवर्तित करने के विषय पर अथवा आपके अनुसार वैज्ञानिकता का विचार विमर्श करने के लिये कोई वस्तु विषय व प्रसंग हो उस पर आप अपना अभिमत प्रकट कर सकते है। आप अपना शोध पत्र प्रस्तुत कर सकते है।

उपलब्ध सुविधायें

  1. यदि आप कार्यशाला में भाग लेना चाहते है तो उसकी सूचना हमें समय पर देंगे। आपको इस स्थान पर सामान्य रूप से रहने तथा भोजन की व्यवस्था करेंगे।
  2. यदि आप विशेष व्यवस्था चाहते है तो उस सन्दर्भ में हम आपका मदद कर सकते है किन्तु विशेष व्यवस्था के लिये अपेक्षित व्यय स्वयं करना होगा।
  3. उद्देश्य को पूर्ण करने की दृष्टि से समयपालन तथा समत्वभावना का पालन अनिवार्य होगा।
  4. कार्यशाला में भाग लेने वाले सभी कार्य शाला के दोरान समान दर्जे के ही माने जायेंगे तथा एक सौहार्द्र पूर्ण वातावरण में विचार विमर्श करने के लिये सहयोग देंगे।
  5. कार्यशाला में पंजीकृत होने के बाद समरसता के साथ विचारों के आदान प्रदान में भाग लेंगे तथा किसी भी प्रकार की आक्षेप तथा किसी भी प्रकार के कलह से बचे रहेंगे।
  6. विचारों को मानना या न मानना व्यक्तिगत स्वातंत्र्य के अन्तर्गत विषय है। अतः इस सन्दर्भ में किसी भी स्थिति में विवाद स्वीकार्य नहीं होगा।

शोध की दृष्टि से संकल्पित इस महायज्ञ में सौहार्द्रपूर्ण वातावरण बनाने तथा उपलब्ध व्यवस्था से सन्तुष्ट होने के आपके संकल्प के लिये हम आभारी है।

पंजीकरण के लिए यहाँ क्लिक करें 

Science of (in) Astrology

We are often afraid of or hesitate to discuss and debate the scientific aspects of Astrology or the Science in Astrology. In many occasions we try our best to avoid discussions on sensitive issues. We try our best to pronounce Jyotish as science and at the same time we become nervous if forced to prove the same or discuss the same. What may be reason behind this?

  1. Our endeavors may prove Jyotish as unscientific?
  2. Our ability may be questioned if and all we fail to prove it!

These two assumptions or fears generally stop us from making any initiatives.

For the sake of self-existence

Often we try to protect our existence. Unanimously acquiring the support or getting the views accepted is considered the best way of keeping alive the existence. We often explode on others when questioned or argued with us. Many times we leave the discussion or/and the place also to mark the dissatisfaction or anger. We often humiliate others on marks of status, class and position of others.

Are you ready?

  1. Are you ready to take part in the discussion with open mind and fearlessness?
  2. Are you ready for a peaceful discussion without any pride and prejudice?
  3. Would you like to erect foundations to your new thoughts?
  4. Are you ready to give way to innovative thoughts without compromising the traditions prevail?
  5. Do you wish to peep into the all different aspects of Indian Astrology?
  6. Do you wish to focus on the reality of planetary affects?
  7. Do you have your own scientific perception on Jyotish?

What the workshop is meant for?

Workshop is mainly meant to discuss the basic scientific issues of Indian Astrology. The participant may take part in discussion or / and submit his research paper on any issue related to Jyotish like time reckoning, time, the consequences of Karma, planetary affects, the accumulated state of Karma, diverting the results of the Karma with the help of planets, or on any own perception of the scientific versions of Indian Astrology.

Facilities available

  1. You need to inform us In time if wish to take part in this workshop. We will arrange general boarding and lodging at our end.
  2. If the participant needs or wishes any special arrangement then we may assist and the participant should bear the expenses.
  3. To fulfill the aim of the workshop the participants are required to be punctual and feeling of oneness,
  4. No special treatment or status or dignity can be demanded in the workshop and all will get equal treatment. Participants may cooperate to carry forward the discussions in friendly climate.
  5. Participants may avoid confrontation and heated arguments.
  6. Accepting on not accepting any one’s views depend on individual and the same may not be demanded.

The workshop is designed to evaluate research perceptive in Jyotish and participants ought to maintain peace, equilibrium and satisfy with the arrangements provided

Click Here to Get Registered 

Location Map